उत्तर प्रदेश के लाखों स्कूली छात्रों के लिए एक बड़ी खबर है। अब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि स्किल सीखने का मौका भी स्कूल में ही मिलेगा। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में वोकेशनल ट्रेनर रखे जाएंगे, जो बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देंगे।
कहाँ और कब शुरू होंगे वोकेशनल कोर्स?
यह योजना प्रदेश के 1701 राजकीय और आशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में लागू होगी। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से इन स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। यानी अभी से लगभग दो साल बाद यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी।
वोकेशनल ट्रेनर को कितना मानदेय मिलेगा?
सरकार ने तय किया है कि हर वोकेशनल ट्रेनर को 15,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। यह राशि नियमित वेतन नहीं बल्कि मानदेय है, जो ट्रेनर को उनकी सेवाओं के बदले मिलेगी। इससे बड़ी संख्या में युवा प्रशिक्षकों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
बच्चों और अभिभावकों पर क्या असर होगा?
इस योजना का सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा। अब वे स्कूल में ही कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण ले सकेंगे। इससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वे पढ़ाई के बाद सीधे नौकरी या स्वरोजगार की ओर बढ़ सकेंगे। अभिभावकों के लिए यह राहत की बात है कि उनके बच्चों को कौशल प्रशिक्षण के लिए अलग से संस्थान नहीं ढूंढने पड़ेंगे।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
उत्तर प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दे रही है। स्कूली स्तर पर स्किल ट्रेनिंग से छात्रों में रोजगार क्षमता विकसित होगी और राज्य में कुशल कार्यबल तैयार होगा। यह कदम बेरोजगारी घटाने और उद्योगों की मांग के अनुरूप शिक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या अभी से तैयारी शुरू हो गई है?
फिलहाल योजना की घोषणा हो चुकी है, लेकिन ट्रेनरों की योग्यता, चयन प्रक्रिया और पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी का इंतजार है। माना जा रहा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा। ट्रेनरों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और संबंधित ट्रेड में अनुभव तय होने की संभावना है।
पक्की जानकारी बनाम अटकलें
पक्की जानकारी: 1701 स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनर रखे जाएंगे। ट्रेनर को 15,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। यह योजना सत्र 2026-27 से लागू होगी।
अभी स्पष्ट नहीं: ट्रेनरों के चयन की प्रक्रिया, योग्यता, पदों की संख्या, और कौन से विशिष्ट ट्रेड पढ़ाए जाएंगे। यह जानकारी आधिकारिक अधिसूचना आने पर ही स्पष्ट होगी।
व्यापक प्रवृत्ति: देशभर में स्किल एजुकेशन पर जोर
यह यूपी सरकार का अकेला कदम नहीं है। पूरे देश में स्कूली पाठ्यक्रम में वोकेशनल ट्रेनिंग को शामिल करने की मुहिम तेज है। केंद्र सरकार की ‘स्किल इंडिया’ योजना और NEP 2020 के तहत राज्यों को व्यावसायिक शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यूपी का यह फैसला इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
अभिभावक और छात्र अभी क्या करें?
जिन स्कूलों में यह योजना लागू होगी, वहां के छात्र सत्र 2026-27 में व्यावसायिक पाठ्यक्रम का विकल्प चुन सकेंगे। अभिभावक अपने बच्चों की रुचि के अनुसार कौशल क्षेत्रों के बारे में जानकारी रखें। ट्रेनर बनने के इच्छुक युवा सरकारी अधिसूचना का इंतजार करें और संबंधित ट्रेड में अपनी योग्यता बढ़ाएं।
आगे क्या होगा?
उम्मीद है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द ही ट्रेनरों की भर्ती प्रक्रिया और पाठ्यक्रमों की सूची जारी करेगा। स्कूलों में बुनियादी ढांचे की तैयारी भी शुरू होगी। 2026-27 सत्र तक सब कुछ दुरुस्त करने का लक्ष्य है। इस योजना के सफल होने पर इसे अन्य स्कूलों में भी बढ़ाया जा सकता है।
हमारा विश्लेषण
यह कदम उत्तर प्रदेश की शिक्षा नीति में एक निर्णायक बदलाव ला सकता है। स्कूली स्तर पर स्किल ट्रेनिंग से छात्रों को न सिर्फ डिग्री बल्कि हुनर भी मिलेगा। हालांकि, 15,000 रुपये मानदेय कुशल ट्रेनरों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह देखना होगा। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है, वरना यह योजना कागजों तक सीमित रह सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वोकेशनल ट्रेनर कौन बन सकता है?
फिलहाल आधिकारिक योग्यता घोषित नहीं हुई है। संभावना है कि किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा या डिग्री और कम से कम दो साल का अनुभव मांगा जा सकता है।
क्या ये ट्रेनर सरकारी कर्मचारी होंगे?
नहीं, ये वोकेशनल ट्रेनर सरकारी कर्मचारी नहीं होंगे। इन्हें मानदेय (honorarium) दिया जाएगा, नियमित वेतनमान नहीं मिलेगा।
किन स्कूलों में यह योजना लागू होगी?
उत्तर प्रदेश के कुल 1701 राजकीय और आशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में। इनकी लिस्ट सरकार जारी कर सकती है।
क्या निजी स्कूलों में भी यह योजना आएगी?
फिलहाल यह केवल राजकीय और एडेड स्कूलों के लिए घोषित की गई है। निजी स्कूलों के लिए अलग से कोई जानकारी नहीं है।