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Haryana Rajya Sabha Election Math Favors New Strategy
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Haryana Rajya Sabha Election Math Favors New Strategy

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Editorial
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    हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव का गणित जितना सीधा दिखाई देता है, राजनीतिक तौर पर उतना ही जटिल भी है। विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए 31 वोट की जरूरत होती है। ऐसे में कागज़ों पर देखें तो दो उम्मीदवारों के लिए जीत का रास्ता आसान लगता है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार की एंट्री ने पूरे समीकरण को दिलचस्प बना दिया है।

    भाजपा की ओर से संजय भाटिया मैदान में हैं और संख्या के लिहाज़ से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। भाजपा के पास अपने और सहयोगी विधायकों को मिलाकर इतनी संख्या है कि 31 का आंकड़ा पार करना उनके लिए मुश्किल नहीं माना जा रहा। इसलिए इस चुनाव में असली मुकाबला दूसरी सीट को लेकर बनता दिखाई दे रहा है।

    कांग्रेस ने दूसरी सीट के लिए करमबीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस के पास भी कागज़ों में इतना समर्थन दिखाई देता है कि वह 31 वोट तक पहुंच सकती है। लेकिन हरियाणा के पिछले दो राज्यसभा चुनावों का इतिहास बताता है कि केवल संख्या होना ही जीत की गारंटी नहीं होता। राजनीतिक प्रबंधन और विधायकों की एकजुटता यहाँ सबसे बड़ा फैक्टर बन जाती है।

    इसी बीच आज़ाद उम्मीदवार सतिश नांदल के मैदान में आने से पूरा चुनाव दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें भाजपा के कुछ विधायकों का अप्रत्यक्ष समर्थन मिल सकता है। इसके अलावा 3 निर्दलीय और 2 इनेलो विधायकों का झुकाव भी उनके पक्ष में बताया जा रहा है। अगर यह समीकरण सही बैठता है तो नांदल के पास करीब 22 वोट तक पहुंचने की संभावना बन सकती है। ऐसे में जीत की रेखा तक पहुंचने के लिए उन्हें कांग्रेस खेमे से करीब 7–8 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

    यही वह बिंदु है जहां से इस चुनाव में असली सियासी खेल शुरू होता है। राज्यसभा चुनाव में मतदान ओपन बैलेट से होता है, लेकिन फिर भी क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक वोटिंग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर तब जब कुछ विधायकों के सामने अपने राजनीतिक भविष्य, अपने परिवार को राजनीति में स्थापित करने की रणनीति और आने वाले समय में होने वाली डिलिमिटेशन जैसी परिस्थितियां भी फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

    यानी यह चुनाव सिर्फ मौजूदा राजनीतिक समीकरणों का नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति के डर और संभावनाओं का भी चुनाव बनता दिखाई दे रहा है। अगर कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है तो करमबीर सिंह बौद्ध की राह आसान हो सकती है। लेकिन अगर कहीं भी थोड़ी सी टूट या क्रॉस वोटिंग हुई तो सतिश नांदल इस मुकाबले को पूरी तरह उलटने की स्थिति में भी आ सकते हैं।

    इसलिए हरियाणा का यह राज्यसभा चुनाव केवल नंबरों का खेल नहीं, बल्कि रणनीति, प्रबंधन और भविष्य की राजनीति के गणित का असली इम्तिहान भी माना जा रहा है।

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